कुमार प्रशांत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कुमार प्रशांत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
घोर तिमिर को चीर चुका है ये नन्हा प्रकाश,

घोर तिमिर को चीर चुका है ये नन्हा प्रकाश,

घोर तिमिर को चीर चुका है ये नन्हा प्रकाश, अब सूरज की बारी है और दूर नहीं आकाश, दीपों की नन्हीं बाती ने अन्धकार हर डाला, जब तक थी एक बूँ...
Read More