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मुहब्बत थी  मुझे  जिससे  उसे कहना नहीं आया

मुहब्बत थी मुझे जिससे उसे कहना नहीं आया

मुहब्बत थी  मुझे  जिससे  उसे कहना नहीं आया , मंचलती  शाम  में दिलवर  मुझे रहना नहीं आया । किसी को प्रेम करता था किसी को कह दिया मैंने ,...
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किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर

किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर

किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर , नहीं फिर प्रेम उग पाया रही दिल की ज़मी बंजर । मैं  बर्षों  से  वही  बैठा  जहाँ  तुमने  कहा...
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