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बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है

बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है

बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है  बहुत ऊँची इमारत हर घडी खतरे में रहती है  ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,  मै...
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तो अब इस गाँव से रिश्ता हमारा खत्म होता है

तो अब इस गाँव से रिश्ता हमारा खत्म होता है

तो अब इस गाँव से रिश्ता हमारा खत्म होता है फिर आँखें खोल ली जायें कि सपना खत्म होता है मुक़द्दस मुस्कुराहट माँ के होंटों पर लरजती है किसी बच...
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