शहीदों के नाम पूरी कविता पढ़ें। जब-जब वहशी पत्थर ले सैनिक को मारा करते हैं, दिल्ली वाले राजधरम का कंस पछाड़ा करते हैं। अपने घर के बा...
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हरेन्द्र सिंह कुशवाह "एहसास"
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तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है
तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है। ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है, त...
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अँधेरे में कभी देखूँ तो तारो में चमकती हो।
अँधेरे में कभी देखूँ तो तारों में चमकती हो। सबेरे धूप में मिल कर मुडेरों पर मटकती हो। अगर मैं तोड़ने जाऊँ जो ...
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मैं हिन्दुस्तान हूँ सरदार के आज़ाद सपनो का
मेरे सीने से निकला है लहूँ अपनो के ज़ख़्मो का , महल कब हाल पूँछेगे घिसीं बेकार सड़को का । मेरी हालत बनाई है किसी अबला अभागिन सी , मैं ...
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सभी इल्ज़ाम शीशे पर ये जग कबतक लगायेगा
सभी इल्ज़ाम शीशे पर ये जग कबतक लगायेगा , भला। नाकामियों को वो यहाँ कैसे छुपायेगा । तुम्हारा है तुम्ही रख लो उजाला ...
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दिल्ली का हुड़दंग देखने मेरी आँखे आयी हैं
दिल्ली का हुड़दंग देखने मेरी आँखे आयी हैं । थोड़ी थोड़ी विषमय है थोड़ी सी कुम्हलाई हैं।। कैसे होती लाशों पर राजनीति को देखा है, मानवता को न...
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आठ भेडिये मार गिराये भारत माँ के लालों ने,
आठ भेडिये मार गिराये भारत माँ के लालों ने, वे-बुनियादी बहस छेड दी चोरो की चौपालों ने. उस शहीद की ताजा मिट्टी पापी सारे भूल गये, वोट बैं...
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