हरेन्द्र सिंह कुशवाह "एहसास" लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हरेन्द्र सिंह कुशवाह "एहसास" लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मैं हिन्दुस्तान हूँ सरदार के आज़ाद सपनो का

मैं हिन्दुस्तान हूँ सरदार के आज़ाद सपनो का

मेरे सीने से निकला है लहूँ अपनो के ज़ख़्मो का , महल कब हाल पूँछेगे घिसीं बेकार सड़को का । मेरी हालत बनाई है किसी अबला अभागिन सी , मैं ...
Read More
दिल्ली का हुड़दंग देखने मेरी आँखे आयी हैं

दिल्ली का हुड़दंग देखने मेरी आँखे आयी हैं

दिल्ली का हुड़दंग देखने मेरी आँखे आयी हैं । थोड़ी थोड़ी विषमय है थोड़ी सी कुम्हलाई हैं।। कैसे होती लाशों पर राजनीति को देखा है, मानवता को न...
Read More
आठ भेडिये मार गिराये भारत माँ के लालों ने,

आठ भेडिये मार गिराये भारत माँ के लालों ने,

आठ भेडिये मार गिराये भारत माँ के लालों ने, वे-बुनियादी बहस छेड दी चोरो की चौपालों ने. उस शहीद की ताजा मिट्टी पापी सारे भूल गये, वोट बैं...
Read More